राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सूर्योपासना, छठ अब राष्ट्रीय पर्व के रूप में उभरा


Edited by Akshay prakash 

देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व — घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब
नई दिल्ली:लोक आस्था, पर्यावरण चेतना और संयम का प्रतीक महापर्व छठ पूजा अब क्षेत्रीय सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय पर्व का रूप ले चुका है। इस वर्ष इसका एक नया अध्याय तब जुड़ा जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वयं भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया।राष्ट्रपति की इस श्रद्धापूर्ण भागीदारी ने पूरे देश में यह संदेश दिया कि छठ अब केवल बिहार, झारखंड या पूर्वांचल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बन चुका है।

 राष्ट्रपति की श्रद्धा बनी राष्ट्रीय चर्चा का विषय

राष्ट्रपति मुर्मू ने दिल्ली स्थित अपने आवास परिसर में परंपरागत विधि-विधान से सूर्योपासना की। उन्होंने छठ व्रतियों के कठोर अनुशासन और स्वच्छता के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा —

> “छठ पर्व भारतीय संस्कृति की उस भावना का प्रतीक है, जिसमें प्रकृति, समाज और परिवार के प्रति कृतज्ञता का भाव निहित है।”



राष्ट्रपति की यह सहभागिता छठ पर्व को राष्ट्रीय पहचान प्रदान करने वाला ऐतिहासिक क्षण बन गई।


🪔 देशभर में गूंजे ‘जय छठी माई’ के स्वर

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, रांची, लखनऊ, पटना, चंडीगढ़, भोपाल और चेन्नई सहित देश के लगभग हर बड़े शहर में घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए लाखों व्रती पारंपरिक गीतों के साथ जल में खड़े दिखाई दिए। शहरों में कृत्रिम तालाबों और सोसाइटी परिसरों में भी सामूहिक घाट बनाए गए।
पूरे वातावरण में “जय छठी माई” और “सूर्य भगवान की जय” के जयघोष गूंजते रहे।

🌞 संयम, स्वच्छता और समर्पण का पर्व

छठ पर्व की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनुशासन और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता है।
व्रती चार दिनों तक शुद्धता, संयम और श्रद्धा का पालन करते हुए भगवान सूर्य एवं षष्ठी माता की आराधना करते हैं।
36 घंटे का निर्जला उपवास इस पर्व को आध्यात्मिक तपस्या का स्वरूप देता है।
इस दौरान केवल प्राकृतिक और शुद्ध अन्न-फल से ही अर्घ्य सामग्री तैयार की जाती है, जो प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है।


🌺 आस्था का संदेश: “अस्त का उदय ही जीवन का सत्य”

छठ पूजा जीवन के गहरे दर्शन को भी प्रकट करती है।
भक्त मानते हैं कि यदि “उदय का अस्त” एक सांसारिक नियम है, तो “अस्त का उदय” एक आध्यात्मिक सत्य है।
यह पर्व सिखाता है कि हर अवसान (अस्त) के बाद एक नया सवेरा (उदय) आता है — यही जीवन की वास्तविकता है।

🇮🇳 छठ: अब राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

देशभर में बढ़ती भागीदारी और राष्ट्रपति की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया है कि छठ पूजा अब केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारत की साझा संस्कृति, स्वच्छता, पर्यावरण और आध्यात्मिकता का राष्ट्रीय उत्सव बन चुकी है।


रिपोर्ट: संवादाता दिल्ली 

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