छठ पूजा की खुशियां मातम में बदलीं,घाट बनाने के दौरान चार मासूम बच्चों की डूबने से मौत, गांव में पसरा मातम


Edited by Akshay prakash 


भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल के इस्माइलपुर थाना क्षेत्र के नवटोलिया गांव में सोमवार को छठ पूजा की तैयारियों के बीच बड़ा हादसा हो गया। छठ घाट की सफाई और सजावट में जुटे चार मासूम बच्चे नदी में डूब गए। घटना के बाद पूरे गांव में कोहराम मच गया और खुशियों का माहौल मातम में बदल गया।


सफाई के बाद नहाने उतरे, चारों की गई जान

ग्रामीणों ने बताया कि बच्चे घाट की मिट्टी समतल करने और सजावट में मदद कर रहे थे। काम खत्म होने के बाद वे नहाने के लिए नदी में उतर गए। इसी दौरान एक बच्चा गहरे पानी में चला गया। उसे बचाने के लिए तीन अन्य बच्चे भी कूद पड़े, लेकिन कोई भी बाहर नहीं निकल सका।
शोर सुनकर जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बच्चों को बाहर निकाला गया, तब तक देर हो चुकी थी। चारों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
एक ही परिवार के दो जुड़वां भाई समेत चार की मौत

मृत बच्चों की पहचान इस प्रकार है –

गोरेलाल मंडल (पुत्र – रूदल मंडल)

कारेलाल मंडल (जुड़वां भाई)

प्रियांशु कुमार (पुत्र – मिथिलेश मंडल)

नंदन कुमार (पुत्र – चंदन मंडल)

चारों बच्चों की उम्र 10 से 13 वर्ष के बीच बताई जा रही है। एक ही परिवार के दो जुड़वां भाइयों समेत चार मासूमों की असमय मौत ने पूरे नवटोलिया गांव को शोक में डुबो दिया है।




 “सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे” — ग्रामीणों का आरोप

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि छठ जैसे बड़े पर्व के बावजूद घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था नाममात्र की थी।
न तो बैरिकेडिंग की गई थी, न ही गोताखोर या सुरक्षाकर्मी तैनात थे। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि छठ पूजा की तैयारियों को लेकर न पंचायत स्तर पर कोई बैठक हुई, न ही प्रशासन ने इलाके का दौरा किया।
मुआवजे और सुरक्षा की मांग

घटना के बाद गांव में हर ओर मातम छाया है। परिजन और ग्रामीण सरकार से मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। साथ ही प्रशासन से अपील की है कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं न हों, इसके लिए सभी घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की जाए।



✍️ संपादकीय टिप्पणी

छठ जैसे महान पर्व पर जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम अपेक्षित होते हैं, वहां प्रशासनिक लापरवाही इस तरह की त्रासदियों को जन्म देती है। यह घटना चेतावनी है कि परंपरा और श्रद्धा के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


रिपोर्ट: भागलपुर | संवाददाता

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