मां की चीख: “मुझे इंसाफ चाहिए, जिसने मेरी बेटी की जिंदगी छीनी उसे फांसी दो”NEET छात्रा की मौत में पोस्टमार्टम ने खोली दरिंदगी की परतें, पुलिस की शुरुआती थ्योरी पर उठे गंभीर सवाल

मां की चीख: “मुझे इंसाफ चाहिए, जिसने मेरी बेटी की जिंदगी छीनी उसे फांसी दो”NEET छात्रा की मौत में पोस्टमार्टम ने खोली दरिंदगी की परतें, पुलिस की शुरुआती थ्योरी पर उठे गंभीर सवाल


Edited by Akshay prakash 

पटना/जहानाबाद।पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ दुष्कर्म और संदिग्ध मौत का मामला अब बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला बन गया है। पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह मामला न तो आत्महत्या का है और न ही अचानक तबीयत बिगड़ने का, बल्कि यह लंबे समय तक चली बर्बर यौन हिंसा और जबरन संघर्ष का नतीजा है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों ने पुलिस की शुरुआती जांच और दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उजागर की संघर्ष की भयावह कहानी
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार छात्रा के शरीर पर कई गंभीर और ताजा चोटों के निशान मिले हैं, जो मौत से पहले के हैं। डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि पीड़िता ने आखिरी सांस तक खुद को बचाने की कोशिश की
रिपोर्ट के मुताबिक छात्रा करीब डेढ़ से दो घंटे तक हमलावरों का विरोध करती रही, जो यह दर्शाता है कि वह न तो बेहोश थी और न ही उसने हार मानी थी।
गर्दन और कंधों पर नाखून के गहरे निशान
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गर्दन और कंधे के आसपास Crescentic Nail Abrasions यानी नाखून से बने गहरे घाव पाए गए हैं।डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे निशान तभी बनते हैं, जब पीड़िता खुद को हमलावर की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश करती है और आरोपी उसे जबरन दबाता या जकड़ता है।ये निशान इस बात की मूक गवाही हैं कि छात्रा ने लगातार प्रतिरोध किया।
छाती और शरीर पर नोचने के कई निशान
रिपोर्ट में छात्रा की छाती और कंधे के नीचे Multiple Scratch Marks दर्ज किए गए हैं। ये खरोंचें एक ही स्थान पर नहीं, बल्कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैली हुई हैं।
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति तब बनती है जब पीड़िता को लंबे समय तक किसी कठोर सतह पर दबाकर रखा जाता है या नाखूनों से बार-बार नोचा जाता है।पीठ पर नीले निशान, संघर्ष लंबे समय तक चला
पोस्टमार्टम में पीठ पर कई Bruises (नीले निशान) भी पाए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि छात्रा की पीठ को बार-बार कठोर सतह से रगड़ा गया।
डॉक्टरों की राय में यह संघर्ष कुछ मिनटों का नहीं, बल्कि लंबे समय तक चला, जिससे यह आशंका भी गहराती है कि वारदात में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।

प्राइवेट पार्ट में गंभीर चोट, जबरन रेप की पुष्टि

पोस्टमार्टम का सबसे अहम और चौंकाने वाला हिस्सा Genital Examination है।रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि छात्रा के प्राइवेट पार्ट में ताजा और गंभीर चोटें, गहरी रगड़ के निशान और अत्यधिक ब्लीडिंग पाई गई है।मेडिकल बोर्ड की साफ राय है कि ये चोटें सहमति से बने संबंध की नहीं, बल्कि forceful penetration यानी जबरन दुष्कर्म का परिणाम हैं।
मेडिकल ओपिनियन: यह स्पष्ट रूप से यौन हिंसा का मामला डॉक्टरों ने अपनी मेडिकल ओपिनियन में साफ लिखा है कि शरीर पर मौजूद सभी चोटें यह साबित करती हैं कि छात्रा होश में थी और उसने खुद को बचाने के लिए लगातार संघर्ष किया।रिपोर्ट के अंत में यह स्पष्ट किया गया है कि उपलब्ध सभी तथ्य sexual violence के अनुरूप हैं। मौत के सटीक कारण की पुष्टि के लिए विसरा सुरक्षित रखा गया है, जिसे आगे की जांच के लिए एम्स भेजा गया है।
पुलिस की थ्योरी बनाम पोस्टमार्टम के तथ्य

इस मामले में पुलिस की शुरुआती थ्योरी अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से टकरा रही है।
पुलिस ने पहले दावा किया था कि छात्रा डिप्रेशन में थी और मोबाइल सर्च हिस्ट्री व नींद की दवा के आधार पर आत्महत्या की आशंका जताई गई थी।
लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर संघर्ष के दर्जनों निशान और यौन हिंसा के पुख्ता सबूत सामने आए हैं, जो इन दावों को कमजोर करते हैं।
यौन शोषण के सबूत नहीं’—पुलिस का दावा भी सवालों में

बेहोशी की थ्योरी पर भी सवाल

पुलिस ने कहा था कि छात्रा बेहोश मिली थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है कि सभी चोटें मौत से पहले की हैं। यह साबित करता है कि छात्रा बेहोश नहीं थी, बल्कि लंबे समय तक हमले का विरोध कर रही थी।

परिवार का आरोप:

 पुलिस किसे बचाना चाहती है?
पीड़िता के परिवार ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि FIR दर्ज होने के बाद हॉस्टल संचालक ने पैसे देकर ‘डील’ करने की कोशिश की।परिवार पूछ रहा है कि अगर मामला साफ था, तो समझौते की कोशिश क्यों की गई?
तीन संदिग्धों को छोड़ने पर भी सवाल
परिजनों का दावा है कि पूछताछ के बाद तीन संदिग्धों को छोड़ दिया गया। परिवार का सवाल है कि यह रिहाई सबूतों के अभाव में हुई या किसी दबाव के कारण।

तीन संदिग्धों को छोड़ने का दावा

परिजनों का कहना है कि पूछताछ के बाद तीन संदिग्धों को छोड़ दिया गया। परिवार पूछ रहा है कि यह रिहाई सबूतों के अभाव में हुई या किसी दबाव में। अगर शुरुआती मेडिकल संकेत इतने गंभीर थे, तो जल्दबाजी में क्लीन चिट क्यों दी गई?

अंदरूनी कड़ी का शक, जानने वाले पर भी संदेह
परिवार को आशंका है कि घटना में पीड़िता का कोई जानने वाला भी शामिल हो सकता है। सवाल यह है कि क्या पुलिस ने कॉल डिटेल, हॉस्टल एंट्री-एग्जिट और जान-पहचान की कड़ियों की गहराई से जांच की?
DGP ने गठित की हाई लेवल SIT

मामले की गंभीरता को देखते हुए DGP विनय कुमार ने हाई लेवल SIT का गठन किया है।
जोनल IG पटना जितेंद्र राणा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। SIT में सात वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जबकि एक महिला थानेदार को जांच से दूर रखा गया है।

SSP बोले– पोस्टमार्टम के अनुसार होगी जांच

पटना के SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के अनुसार ही आगे की जांच की जा रही है। FSL रिपोर्ट का इंतजार है और मृतका के मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि डिलीट डेटा भी रिकवर किया जा सके।
प्रशांत किशोर ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर जहानाबाद पहुंचे और पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की आत्मा को झकझोर देने वाली है। यदि शुरुआती जांच में चूक हुई है, तो उसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।
मां की चीख: “मेरी बेटी को न्याय चाहिए”
पीड़िता की मां का दर्द शब्दों से परे है। उन्होंने रोते हुए कहा,मेरी बेटी पढ़ने गई थी। 6 तारीख को फोन आया कि वह बेहोश है। जब उससे मिली तो उसने कहा—मेरे साथ गलत किया गया है, तीनों मिले हुए हैं। मुझे इंसाफ चाहिए, जिसने मेरी बेटी की जिंदगी छीनी उसे फांसी दो।”

यह सिर्फ एक केस नहीं, हर बेटी का सवाल
यह मामला अब केवल एक छात्रा की मौत नहीं, बल्कि देश में बेटियों की सुरक्षा, पुलिस जांच की पारदर्शिता और न्याय व्यवस्था की सच्ची परीक्षा बन चुका है। सवाल यही है—क्या दरिंदगी के खिलाफ इंसाफ मिलेगा या सच दबा दिया जाएगा?

रिपोर्ट:पवन शर्मा 

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