धनबाद की सड़कों पर कानून फेल, जातिसूचक नंबर प्लेटों की खुली परेड,‘YADAV’ के बाद अब ‘RAJPUT’ नियमों को ठेंगा, रौब सड़क पर!*
धनबाद की सड़कों पर कानून फेल, जातिसूचक नंबर प्लेटों की खुली परेड,‘YADAV’ के बाद अब ‘RAJPUT’ नियमों को ठेंगा, रौब सड़क पर!
Edited by Akshay prakash
धनबाद: जिले में फैंसी और जातिसूचक नंबर प्लेट अब शौक नहीं, बल्कि खुलेआम कानून को चुनौती देने का जरिया बनती जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि सड़कें ट्रैफिक नियमों से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के ट्रेंड से चलती नजर आ रही हैं।कुछ दिन पहले ‘YADAV’ लिखी फैंसी नंबर प्लेट का वीडियो वायरल हुआ था। भारी चर्चा के बाद ट्रैफिक डीएसपी अरविंद कुमार और जिला परिवहन पदाधिकारी दीवाकर सी. द्विवेदी ने कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त किया। प्रशासन की इस कार्रवाई को लोगों ने सराहा और लगा कि अब ऐसे दिखावों पर रोक लगेगी।
लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं चली।अब ताजा मामला बरवाअड्डा हाईवे क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक स्कॉर्पियो वाहन पर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बड़े-बड़े अक्षरों में ‘RAJPUT’ लिखा हुआ नंबर प्लेट देखा गया।
*नंबर प्लेट कम और मानो जाति का पोस्टर ज्यादा नजर आ रहा था।
इस वाहन का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रही हैं
और एक बार फिर वही सवाल खड़ा हो गया है—
क्या धनबाद में कानून सिर्फ आम गाड़ियों के लिए है?,क्या रसूख और दिखावा नंबर प्लेट से ऊपर है?*
क्या कहता है कानून?
मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन के नंबर प्लेट पर केवल निर्धारित फॉर्मेट में रजिस्ट्रेशन नंबर होना चाहिए।
जाति, नाम,पद, उपनाम किसी भी तरह का अतिरिक्त शब्द या चिन्हपूरी तरह अवैध है।
इसके बावजूद बार-बार ऐसे मामले सामने आना यह साबित करता है कि कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझ रहे हैं और खुलेआम सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं।
वायरल होगा तभी जागेगा सिस्टम?
मामला तब और गंभीर हो जाता है जब हर बार कार्रवाई वायरल होने के बाद ही होती है।
इस नए मामले में भी निजी चैनल पर खबर चलने के बाद ट्रैफिक डीएसपी अरविंद कुमार सिंह ने संज्ञान लिया और संबंधित वाहन की तलाश तेज करने के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि पुलिस टीम को अलर्ट कर दिया गया है और वाहन मिलते ही नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि अगर यह वाहन कहीं नजर आए तो तुरंत धनबाद पुलिस को सूचना दें।
जनता पूछ रही है तीखे सवाल अब शहर में चर्चाएं तेज हैं—
क्या कार्रवाई सिर्फ कैमरे और वायरल पोस्ट तक सीमित है? क्या नियम सिर्फ आम आदमी की बाइक और ऑटो के लिए हैं?क्या रसूखदारों के लिए नंबर प्लेट भी स्टेटस सिंबल बन चुकी है?
फिलहाल सच्चाई यही है कि धनबाद की सड़कों पर गाड़ी की पहचान नंबर से नहीं,बल्कि जाति के बोर्ड से हो रही है,और कानून…वो हर नई वायरल एंट्री का इंतज़ार करता नजर आ रहा है
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